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  • pro . vivek kumar kya pagal haiye hindu nai hai

  • कहा जाता है क्रिकेट मैदान में सबसे बुद्धिमान शख्स कॉमेंटेटर होता है!! हाल ही में अपने विचार व्यक्त करते हुए भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान ने कहा: “कॉमेंटेटर बोक्स” में बैठकर कॉमेंटेटर बयानबाज़ी करते रहते हैं, ज़रा वे मैदान पर उतरकर स्थिति को समझे, तो जानूँ।“ धोनी का यह कथन निजी चैनलों के मॉडरेटरों पर भी सटीक बैठता है।
    डिबेटों में moderators अपनी राय व्यक्त करते रहते हैं;(उनकी राय दर्शकों को नहीं चाहिए) प्रतिभागियों को प्रश्न पूछकर और उनके जवाब आरँभ होने के चन्द लमहों के अन्दर टोककर कुछ और प्रश्न करते हैं या फिर अपनी बात कहने लगते हैं। आधे घंटे के debate में अधिकाँश समय moderators ज़ब्द करते हैं!! Debate कैसे समाप्त करना है उसका भी कोई ज्ञान नहीं है। समय खत्म होते देख आकस्मिक रूप से debate को समाप्त कर देते हैं। उन्हें पहले से ही एक प्रारूप बनाकर उसके अनुसार debate को आगे बढाना चाहिए, न कि आकस्मिक रूप से बन्द कर दें। उनकी अव्यवस्थित शैली के कारण debates में इतना शोर होता है कि कुछ समझ में नहीं आता कौन क्या कह रहा है। अक्सर देखा गया मॉडरेटर स्वयं आपे से बाहर हो जाते हैं! बहुत खूब! इन गुस्ताखियों में न्यूज़ 24 के श्री मनाक गुप्ता, श्री अखिलेश आनन्द, ज़ी टी के रूबिका लियाकत, ए.बी.पी. की नेहा शर्मा इत्यादि शीर्ष पर है। वे ऐसे बात करते हैं मानों आमंत्रित लोगों से वे बहुत अधिक बुद्धिमान हैं!! उन्हें अपने कार्य में दक्षता होनी चाहिए। वे समय सीमा को समझें, सवालों को तैयार रखें और अपने सवालों को संक्षित रखें। देखा गया है कि इन मोडरेटरों के सवाल, जवाबों से भी लम्बे होते हैं!! जब शंकराचार्यजी जैसे महानुभावों को वादविवाद में शामिल किया जाता है, ज़रा तमीज़ से बोलें। इन चैनलों के अधिकारियों को चाहिए कि वे डिबेटों की समीक्षा करें और जो असमर्थ नज़र आये तत्काल उन्हें हटाकर न्यूज़रीडर बनाएँ। मैं जानना चाहता हूँ जितनी तेज़ी से ये लोग बोलते हैं क्या ये उतनी ही ही तेज़ी से खबरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने में सक्षम हैं? और शुद्ध भाषा में? लगता है आपको ऐसे लोग चाहिए जो फर्राटेदार (धाराप्रवाह) हिन्दी बोलते हों और देखने में आकर्षक हों चाहे वे अपने कार्य में दक्ष हों या न हों!! जिस बदतमीज़ी से साक्षात्कारकर्ता और मोडरेटर आमंत्रित लोगों से बात करते हैं, मुझे लगता है ये लोग अपने घर पर भी बुज़ुर्गों से ऐसे ही बर्ताव करते होंगे।

    I wish the authorities allow these interviewers to watch interviews and debates in foreign TV channels, including Pakistani channels, to understand how well they devise and plan interviews. Till date only one person among Hindi private channels has given a good account of himself: Rajat Sharma. He is a class interviewer –never behaves as if he is the most intelligent man around!! He is never loud, always to the point, never loses temper and keeps sentiments under control and brings to an end every episode in a logical and smooth way. For him the invitee is the most important person. Hats off to him.

    Surendra Sharma (Chennai)

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